Monday, July 21, 2014

●जैसलमेर का कुलधरा● एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर जो भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक भी है:

राजस्थान के जैसलमेर शहर से 18 किमी दूर स्थित कुलधरा गांव आज से 500 साल पहले 600 घरों और 85 गावों का पालीवाल ब्राह्मणों का साम्राज्य ऐसा राज्य था जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती हे...
रेगिस्तान के बंजर धोरो में पानी नहीं मिलता वहां पालीवाल ब्राह्मणों ने ऐसा चमत्कार किया जो इंसानी दिमाग से बहुत परे है .
पालीवाल समुदाय के इस इलाक़े में चौरासी गांव थे और यह उनमें से एक था । मेहनती और रईस पालीवाल ब्राम्‍हणों की कुलधार शाखा ने सन 1291 में तकरीबन छह सौ घरों वाले इस गांव को बसाया था। कुलधरा गाँव पूर्ण रूप से वैज्ञानिक तौर पर बना था। ईट पत्थर से बने इस गांव की बनावट ऐसी थी कि यहां कभी गर्मी का अहसास नहीं होता था।
कहते हैं कि इस कोण में घर बनाए गये थे कि हवाएं सीधे घर के भीतर होकर गुज़रती थीं । कुलधरा के ये घर रेगिस्‍तान में भी वातानुकूलन का अहसास देते थे । इस जगह गर्मियों में तापमान 45 डिग्री रहता हैं पर आप यदि अब भी भरी गर्मी में इन वीरान पडे मकानो में जायेंगे तो आपको शीतलता का अनुभव होगा।
गांव के तमाम घर झरोखों के ज़रिए आपस में जुड़े थे इसलिए एक सिरे वाले घर से दूसरे सिरे तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सकती थी। घरों के भीतर पानी के कुंड, ताक और सीढि़यां कमाल के हैं ।
उन्होंने जमीन में उपलब्ध पानी का प्रयोग नहीं किया, ना ही बारिश के पानी को संग्रहित किया बल्कि रेगिस्तान के मिटटी में मौजूद पानी के कण को खोजा और अपना गाव जिप्सम की सतह के ऊपर बनाया, उन्होंने उस समय जिप्सम की जमीन खोजी ताकि बारिश का पानी जमीन सोखे नहीं.
और आवाज के लिए गांव ऐसा बसाया कि दूर से अगर दुश्मन आये तो उसकी आवाज उससे 4 गुना पहले गांव के भीतर आ जाती थी. हर घर के बीच में आवाज का ऐसा मेल था जैसे आज के समय में टेलीफोन होते हैं.
जैसलमेर के दीवान ये बात हजम नहीं हुई की ब्राह्मण इतने आधुनिक तरीके से खेती करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं तो उन्होंने खेती पर कर लगा दिया पर पालीवाल ब्राह्मणों ने कर देने से मना कर दिया.
उसके बाद दीवान सलीम सिंह को गाँव के मुखिया की बेटी पसंद आ गयी तो उसने कह दिया या तो बेटी दीवान को दे दो या सजा भुगतने के लिए तैयार रहो.
ब्राह्मणों को अपने आत्मसम्मान से समझौता बिलकुल बर्दाश्त नहीं था इसलिए रातोरात 85 गावों की एक महापंचायत बैठी और निर्णय हुआ की रातोरात कुलधरा खाली करके वो चले जायेंगे.
रातोरात 85 गाँव के ब्राह्मण कहाँ गए कैसे गए और कब गए इस चीज का पता आजतक कोई पता नहीं लगा है. पर जाते जाते पालीवाल ब्राह्मण शाप दे गए की ये कुलधरा हमेशा वीरान रहेगा इस जमीन पर कोई फिर से आके नहीं बस पायेगा.
आज भी जैसलमेर में जो तापमान रहता है गर्मी हो या सर्दी, कुलधरा गाव में आते ही तापमान में 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो जाती है. वैज्ञानिकों की टीम जब पहुची तो उनकी मशीनो में आवाज और तरंगों की रिकॉर्डिंग हुई जिससे ये पता चलता हे की कुलधरा में आज भी कुछ शक्तियाँ मौजूद हैं जो इस गांव में किसी को रहने नहीं देती. मशीनो में रिकॉर्ड तरंगे ये बताती हैं की वहां मौजूद शक्तियां कुछ संकेत देती हैं.
आज भी कुलधरा गांव की सीमा में आते हैं मोबाइल नेटवर्क और रेडियो काम करना बंद कर देते हैं पर जैसे ही गावं की सीमा से बाहर आते हे मोबाइल और रेडियो शुरू हो जाते हैं |
आज भी कुलधरा शाम होते ही खाली हो जाता है और कोई इन्सान वहां जाने की हिम्मत नहीं करता. जैसलमेर जब भी जाना हो तो कुलधरा जरुर जाएं |

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